अकेला पन

रात के नौ बजे थे इला काम निपटा कर अपनी मां मधुरिमा के साथ टीवी देखने बैठी ही थी कि तभी फोन की [...]

रिश्तों की समझ

आजकल मुकेश की प्रसन्नता का कोई ठिकाना नहीं था ‌। पिछले छः सात सालों से सेल्समैन बनकर दर-दर की ठोकरें खा रहा था,रात [...]

प्रायश्चित

संध्या की बेला काटना शिल्पा के लिए पिछले दो सालों से दुखद अहसास हो गया था। अपने पति प्रतीक को उसने कितनी बार [...]

उम्मीदें

चित्रा रसोई में खाना बना रही थी लेकिन ध्यान सामने वाले फ्लैट पर था। बहुमंजिला इमारत थी,हर मंजिल पर चार फ्लैट थे, कोरिडोर [...]

धोखा

भूमि रसोई में काम करती जा रही थी और भुनभुनाती जा रही थी। वरूण ने हद कर दी चार पांच घंटे पहले बता [...]

खालीपन

शशांक को हैदराबाद में नौकरी करते छः महीने हो गए थे, वसुंधरा रोज़ उससे रात को एक सवा घंटे फोन पर बात करती,तब [...]