यादगार पल

बेटा कालेज की पढ़ाई करने दूसरे शहर जा रहा था और अपना सामान बांध रहा था । मैं वहीं उसके आसपास मंडरा रहा [...]

सुरक्षा कवच

तुलिका ने अस्पताल से बाहर निकलकर आॅटो लिया और घर का पता बताकर आंखें बंद करके बैठ गई | वह भाव-विह्वल थी, आंखों [...]

बौना

मोनिका को जब डाक्टर ने डेंगू का असर बताया तो उसने गांव से अपनी देवरानी ललिता को बुलवा लिया। पंद्रह दिन घर व्यवस्थित [...]

जिंदा हूं।

रवि को घर जाने की कोई शीघ्रता नहीं थी इसलिए मेट्रो से उतरकर चहलकदमी करता हुआ घर की ओर चल दिया। दो महीने [...]

मासूमियत

तेरह वर्षीय रीमा पिता के साथ स्कूटी पर घर जा रही थी कि रास्ते में स्कूटी खराब हो गई। स्कूटी ठीक होने में [...]

अपने पराएं

पति की मृत्यु के बाद सुमित्रा को मजबूरन अपने पुत्र और पुत्रवधू के पास महानगर में आकर रहना पड़ रहा था । बहू [...]

मां की पाती

पति के गुजरने के बाद से सुमित्रा पांच साल से अकेली गाजियाबाद में रह रही थी ।पुत्र अपने परिवार के साथ हैदराबाद रहता [...]

भारी कंगन

पति को गुज़रे चार साल हो गए थे, दोनों बच्चे विदेश में बस गए थे। सुमित्रा के जीवन में एकाकी पन और खालीपन [...]

अकेला पन

रात के नौ बजे थे इला काम निपटा कर अपनी मां मधुरिमा के साथ टीवी देखने बैठी ही थी कि तभी फोन की [...]