अकेला

Alone

संजय के पैर लड़खड़ा रहे थे ,हृदय घबरा रहा था। आगे क्या होगा उसकी समझ नहीं आ रहा था। घर जाने की उसकी हिम्मत नहीं हो रही थी। दिल कह रहा था कहीं भाग जाए या तेजी से आती गाड़ियों के आगे कूद जाए। अच्छा खासा ऑफिस में अपना अकाउंट का काम कर रहा था। बॉस ने बुलाकर  उनके घर जाने को कहा। कोई नल  खराब हो गया था पानी बहता जा रहा था। वह इस तरह के कामों में माहिर था। ऑफिस में भी कई बार प्लंबर को बुलाने की आवश्यकता नहीं पड़ती थी, वह ठीक कर देता था।वह बॉस के घर पहुंचा तो देखा शयन कक्ष से जुड़े स्नान घर के नल से पानी फव्वारे की तरह चारों  दिशाओं को गिला कर रहा था। उसने शर्ट उतार कर नल ठीक कर दिया। स्नान घर से बाहर आया तो बॉस की पत्नी पलंग पर लेटी करहा रही थी। उसने उसे इशारे से अपने पास बुलाया। वह घबरा गया कहीं उसकी तबीयत तो खराब नहीं थी। लेकिन उसके करीब जाते ही बॉस की पत्नी ने संजय को पलंग पर खींच लिया, संजय ने घबराकर अपने आप को छुड़ा तो लिया पर वह हंसते हुए बोली,” तुम्हारी वीडियो बना ली है, बिना शर्ट के तुम  मेरे साथ गलत आचरण कर रहे थे ।अब मैं जब चाहूं तुम्हें फोन  करूं तो आ जाना नहीं तो वीडियो मैं सार्वजनिक कर दूंगी। परिणाम क्या होगा जानते ही होंगे, नौकरी छूट जाएगी, बदनामी होगी और जेल भी जा सकते हो।”

संजय यह सुनकर पसीना पसीना हो गया ,भारी कदमों से घर की तरफ चल तो दिया लेकिन भविष्य में क्या होगा यह सोच उसकी जान सूख रही थी।

घर सामने था लेकिन अंदर जाने की हिम्मत नहीं हो रही थी ।उसकी बात कोई नहीं सुनेगा ,सब उस स्त्री की बात को सही मानेंगे ,उसे गुनहगार मानेंगे और वह अपने स्त्री होने का लाभ उठाएगी ‌।उसने कभी भी किसी स्त्री के साथ गलत हरकत नहीं की थी। बचपन में अपनी छोटी बहन की शरारतों का दंड  उसे मिलता और मां हंस कर कह देती,” क्या हुआ एक दो पड़ भी गए तो, बहन है कल पराए घर चली जाएगी।”

कॉलेज में भी उसने  कभी किसी लड़की  से कोई ओछी हरकत नहीं की थी ।मां बाप ने जिस लड़की से उसका रिश्ता पक्का किया उसने चुपचाप शादी कर ली ।पत्नी गरिमा भी तुनक मिजाज स्त्रि थी ‌। बात बात पर गुस्सा हो जाती  ,शांति बनाए रखने के लिए वह चुपचाप उसकी हर बात मान जाता था ।तीन महीने की गर्भवती है इस कारण और भी चिड़चिड़ी रहती है। उसको पता चल गया तो और जीना हराम कर देगी उसका ।तभी उसके फोन की घंटी बजी गरिमा फोन पर गुस्से में बोल रही थी ,”कहां रह गए हो? मैं क्या बार-बार खाना गर्म करती रहूंगी?”

वह हडबड़ा कर बोला,” नहीं नहीं बस आ गया।” कह कर घर में घुस गया। उसको देखते ही वह कड़क आवाज में  बोली ,”क्या हुआ तुम इतने थके हुए क्यों लग रहे हो ?”

संजय उससे आंखें नहीं मिला पा रहा था,” कुछ नहीं बस यूं ही।”

वह घूरते हुए तेज आवाज में बोली,” कुछ तो हुआ है सच बताओ क्या बात है।”

वह इतना थक गया था और मायूस हो चुका था कि झूठ बोलने और बहाना बनाने की अब उसमें हिम्मत नहीं रही थी ।वह सोफे पर बैठ गया और सब सच-सच बता दिया। उसे लग रहा था अब गरिमा उस पर चिल्लाना शुरू कर देगी, उसकी ही गलती बताएगी। उसने निश्चय कर लिया था वह  घर छोड़कर चला जाएगा ।जैसा उसने सोचा था गरिमा चिल्ला रही थी ,”मुंह तोड़ दूंगी चुड़ैल का, उसकी हिम्मत कैसे हुई मेरे पति पर ऐसे लांछन लगाने की।”

वह आश्चर्यचकित उसकी तरफ देखते हुए बोला ,”तुम्हें विश्वास है ना कि मैं ऐसा नहीं कर सकता।”

गरिमा उसकी आंखों में आंखें डाल कर बोली ,”अपने से अधिक तुम पर भरोसा है ,तुम किसी स्त्री के साथ कभी गलत हरकत नहीं कर सकते।” संजय की जान में जान आई वह बोला,” और नौकरी भी छूट सकती है।” गरिमा ने उसके पास बैठते हुए उसका हाथ पकड़ते हुए कहा,” नौकरी छूटने के डर से क्या गलत इल्जाम सहन कर लेंगे। हम मिलकर सब का सामना करेंगे।उस औरत से तो मैं बात करूंगी।”

संजय की आंखें नम हो गई और गरिमा की गोद में सिर रखकर लेट गया। उसे अब कोई चिंता नहीं थी, वह अकेला नहीं था।

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