अस्तित्व

Astitv

सरोजनी उस लड़की का बेसब्री से इंतजार कर रही थी जो पहले दिन बुटीक से पोशाक खरीद कर ले गईं थीं। सरोजनी ने बुटीक में काम करना पिछले छः महीने से शुरू किया था , बच्चें बड़े हो गए थे अपने अपने काम में व्यस्त।पति के दिमाग में उसका वही स्थान था जो चौबीस साल पहले था , मतलब वह कुछ नहीं करती थी ना कर सकतीं थीं।चार दीवारों से कितना बातें करती तो बाहरी दुनिया में कदम रखा ।सब कुछ अनजाना सा लगा , दुनिया बहुत बदल गई थी , आगे निकल गईं थीं। किसी के पास उसके लायक कोई काम नहीं था फिर उसकी सहेली ने अपने बुटीक में देखभाल का काम सौंप दिया। शुरू में बहुत गलतियां होती थी , आत्मविश्वास भी डगमगाया रहता था । लेकिन अब उसे अच्छा लगने लगा था , प्रतिदिन नये लोगों से मिलना स्वयं के कमाये पैसों को गिनना , कुछ नया सृजनात्मक कार्य करना , उसे संतुष्टि का अनुभव होने लगा था।

वह लड़की अभी तक नहीं आई थी , सरोजनी की बैचेनी बढ़ती जा रही थी।उसकी ज़रा सी लापरवाही के कारण उस लड़की को कितनी परेशानी उठानी पड़ी होगी। पहले दिन आईं थीं वह लड़की खरीददारी करने उस बुटीक पर । परिधानों को देखते ही उत्साहित हैं गई और अपनी पसंद का एक गुलाबी रंग का ड्रेस निकाल कर उसने पहना । शीशे में अपना अक्स देखकर मुस्कुरा रही थी, ऐसा लग रहा था वह पोशाक बनीं ही उसके लिए थी।वह सरोजनी से बार बार पूछ रही थी ड्रेस कैसी लग रही है उसपर ।

तभी एक लम्बा चौड़ा नौजवान वहां आया और उस लड़की की तरफ गुस्से से देखते हुए बोला :” यह क्या सादा सा गाउन पसंद किया है । पार्टी में सबसे महंगा तुम्हारा लिबास होना चाहिए ,लगे तो अग्रवाल खानदान की बहू हों।”

उसके बाद उस बंदे ने जो निसंदेह उसका पति था एक से एक महंगें गाउन उसको पहनवा कर देखें। उस लड़की को अब खरीददारी में कोई दिलचस्पी नहीं रही थी ,उसका ध्यान आसपास के लोगों में था ,मन में विचार होगा न जाने क्या सोच रहे हैं सब।वह यंत्र चलित पति द्वारा पसंद किए गए लिबास पहनती रही और अंत में उस बंदे ने एक महंगा सुनहरे काम वाला गाउन खरीद लिया। सरोजनी को उस बंदे पर गुस्सा आ रहा था , उसे लगा जब उसने इस लड़की से शादी की थी तब तो उसकी खूबसूरती और कोमलता पर रीझ कर

शादी की होगी और अब उसके उन्हीं गुणों को कुचलने में लगा था। जल्दबाजी में गाउन के साथ सरोजनी  बेल्ट रखना भूल गईं और बाद में जब उसे अपनी गलती का एहसास हुआ तो बहुत अफसोस हुआ कि न जाने उस लड़की को इस गलती के कारण क्या सहन करना पड़ा होगा।

सरोजनी की निगाह दरवाजे पर लगीं थीं कि वह लड़की आती दिखाई दी। माफी मांगते हुए सरोजनी ने बेल्ट उसकी तरफ बढ़ा दी। लड़की की सूजी हुई आंखें देखकर सरोजनी का मन दुखी हो रहा था , उसने धीरे से पूछा :” बहुत बुरा भला कहा उसने,इस बेल्ट के कारण।”

लड़की ठहर गई , आंखें उठाकर सरोजनी को देखा तो उनमें पानी था , दांतों से होंठ दबाते हुए उसने हां में सिर हिलाया। सरोजनी से रहा नहीं गया :” क्यों सहती हों?”

जिन सिसकियों को रोकने के लिए वह अपने दांतों से होंठों पर अत्याचार कर रही थी ,फूट पड़ी। कुछ पल बाद संभल कर बोली :” बहुत प्यार करती हूं उनसे, ऐसा भावनात्मक जुड़ाव है कि उनके बिना जीवन की कल्पना नहीं कर सकतीं।”

सरोजनी :” यह भावनात्मक जुड़ाव नहीं भावनात्मक निर्भरता है, उसने तारीफ कर दी तो दिल खुश अगर झिड़क दिया तो दिन खराब। तुम्हारी पसंद नापसंद, पहनना ओढ़ना तुम्हारा अधिकार है ,उसको अपने अस्तित्व को इस तरह कुचलने मत दो। उसके इस रवैए के चलते अब तक उसके प्रति प्रेम अपने हृदय में संजोए रख सकतीं हों।उसको जीवनसाथी बनाया है मालिक नहीं कि वह तुम्हारी भावनाओं और इच्छाओं को नियंत्रित करें।”

वह लड़की सरोजनी की बात सुनकर बोली :” आप ठीक कह रही है ,हर बार उनके इस रवैए से अंदर कुछ मर जाता है। इसके पहले की चलती-फिरती लाश बन जाऊं मुझे अपने अस्तित्व की रक्षा के लिए इनके सामने खड़ा होना पड़ेगा।इनको महसूस कराना होगा की मैं भेड़-बकरी नहीं की कहीं भी हांक ले।”

सरोजनी ने हामी में सिर हिलाते हुए कहा :” पहले अपने आप को पहचानो , अपनी स्वयं की इज्जत करों तभी दूसरों से करवा सकतीं हों।”

वह लड़की आत्मविश्वास और दृढ़ता के साथ वहां से निकलीं।

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