बौना

Bauna

मोनिका को जब डाक्टर ने डेंगू का असर बताया तो उसने गांव से अपनी देवरानी ललिता को बुलवा लिया। पंद्रह दिन घर व्यवस्थित रहा और उसे आराम भी खूब मिल गया। सास ससुर ने पहले मोह वश फिर स्वार्थ वश देवर को पढ़ने शहर नहीं भेजा। बारहवीं करते ही उसे दुकान पर बिठा दिया। आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं थी इस कारण रिश्ते भी ऐसे ही आएं। ललिता के पिता का बहुत पहले निधन हो गया था और मां ने किसी तरह सिलाई कढ़ाई करके घर चलाया।

मोनिका के दिल में इस बार देवरानी के लिए उदारता का भाव भर गया। उसने देवर को परिवार सहित पांच दिन के लिए दिवाली पर आने का न्योता दे दिया सोचा शहर की रौनक देख लेंगे।सास ससुर के लिए यात्रा करना इस उम्र में उचित नहीं यह उसका मानना था। देवर को दुकान और माता पिता को  अकेले छोड़कर जाना उचित नहीं लगा इसलिए पत्नी को पुत्र के साथ भेज दिया। ललिता का मन नहीं था दिवाली पति के बिना मनाने का लेकिन  जेठ जेठानी के लिहाज में खामोश रहीं।

मोनिका का पति सरकारी नौकरी में अच्छे पद पर था और वह स्वयं भी पैसे वाले घर से थी।पांच दिन लोगों का आना-जाना लगा रहा और तोहफों का ढेर लग गया। ललिता ने मेहमानों की बहुत आवभगत की , मोनिका को कोई काम नहीं करने दिया। मोनिका ने निश्चय कर लिया कि जाते समय ललिता को दो चार तोहफ़े अवश्य देगी।

जब ललिता उसकी बीमारी में आईं थीं तब  उसने दो नईं साड़ी निकाल कर दी थी।पता नहीं उसे किसने दी थी , उसे पसंद नहीं थी, लेकिन गांव में सब चल जाती है ।

ललिता को उसकी मां ने किसी के हाथ एक साड़ी और मिठाई का डिब्बा भिजवाया था । साड़ी खोल कर दिखाते हुए ललिता ने नमः आंखों से बताया :” पिछले चार महीने से मां इस साड़ी पर हाथ से कढ़ाई कर रही है । औरों का इतना काम रहता है कि अपने काम के लिए समय निकालना मुश्किल हो जाता है।”

साड़ी का काम देखकर मोनिका दंग रह गयी , इतना बारीक और खुबसूरत काम उसकी बुटीक वाली दस हजार में भी न करके दें।

खैर उसे तोहफों में से समझ नहीं आ रहा था ललिता को क्या दे।उसे लगा महंगी और नाजुक क्रोकरी का ललिता क्या करेंगी ,जो चादरें आयीं थी वे इतनी सुन्दर थी उसे लगा उसके कमरों में अधिक शोभनीय लगेगी। कपड़े तोहफ़े में रिश्तेदारों ने इतने प्यार से दिए थे कि उनको अगर ललिता को दिए तो सबको कितना बुरा लगेगा। अतः ललिता को जाते हुए उसने एक डिब्बा मिठाई का पकड़ा दिया। ललिता ने बड़े प्रेम से डिब्बा लेते हुए उसकी तरफ मां के द्वारा भेजी हुई साड़ी बढ़ाते हुए कहा:”भाभी यह साड़ी आपको इतनी पसंद आई थी , मेरी तरफ से दिवाली का तोहफा स्वीकार कीजिए।”

मोनिका बहुत बौना महसूस कर रही थी।

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