धोखा

Dhokha

भूमि रसोई में काम करती जा रही थी और भुनभुनाती जा रही थी। वरूण ने हद कर दी चार पांच घंटे पहले बता रहा है वह पंद्रह बीस मेहमानों को रात के खाने पर बुला रहा है। आज भूमि ने निश्चय कर लिया था वह वरूण से बहुत लड़ेंगी, छोड़ेगी नहीं उसे।वह ऐसा कैसे  कर सकता है,दस साल हो गए शादी को और उसकी हर  मनमानी वह माफ़ कर देती है उसकी एक मुस्कुराहट पर। लेकिन आज उनकी सात साल की बेटी दीक्षा का जन्म दिन था और वह चाहती थी इस बार बस वो तीनों दीक्षा की मनपसंद जगह पर उसकी पसंद का खाना खाएं। लेकिन वरुण पक्का भूल गया होगा, अपने काम में इतना व्यस्त रहता है , उसे कुछ ध्यान नहीं रहता, इसलिए घर की सारी जिम्मेदारी भूमि ने अपने ऊपर ओढ़ रखी थी।

ध्यान तो वरुण को कालेज के समय से ही बहुत कम बातों का रहता था लेकिन तब लापरवाही के कारण और अब भूमि को लगता है जिम्मेदारियों के कारण। वह शुरू से ही बहुत व्यवस्थित थी, कामों की लिस्ट बना कर रखती, फिर मजाल है उससे कोई गलती हो जाएं। उसका यही गुण शुरू में वरूण और माया से दोस्ती का आधार बना था। दोनों ही आधुनिक विचारधारा और रहन  सहन के आदि मस्ती और मजाक को जिंदगी का मकसद मानते थे। शुरू में तीनों एक दूसरे को नहीं जानते थे लेकिन कक्षा कार्य के किसी प्रोजेक्ट के लिए तीनों की टीम बनी और ऐसा तालमेल बैठा की वह दोस्ती में परिवर्तित हो गया। भूमि सूची तैयार करती कहां से क्या जानकारी हासिल करनी है, वरूण घूम कर शोधकार्य करता जानकारी इकट्ठा करता, फिर तीनों उसको व्यवस्थित करते और जब माया अपनी शानदार आवाज और धाराप्रवाह अंग्रेजी में सबके सामने बोलती तो प्रेजेंटेशन बहुत सराहनीय हो जाती। शीघ्र ही तीनों की अच्छी दोस्ती हो गई । भूमि एक मध्यम परिवार से थी , कोई न कोई चिंता करना उसका स्वभाव था लेकिन वरूण के मस्तमौला और मजाकिया व्यवहार के कारण वह सब भूल जाती।वरूण शहर के बहुत बड़े बिल्डर का इकलौता बेटा था , पैसा उसके हाथ का मैल था।माया के मां बाप का तलाक हो चुका था,वह मां के साथ रहती थी, पैसे की कमी नहीं थी लेकिन रिश्तों से विश्वास उठ गया था।

भूमि को पता ही नहीं चला कब वह वरुण की दिवानी हो गई, लेकिन उसने अपने मन की बात मन में ही रखीं। वैसे भी कालेज में सब को लगता था वरूण और माया की जोड़ी शानदार थी मानो दोनों एक दूसरे के लिए ही बने हों। किसी भी सांस्कृतिक कार्यक्रम या फैशन शो में हिस्सा लेते तो दोनों माडल से कम नहीं लगते । वह लम्बे बालों में तेल चुपड़ कर रखती और सब हंस कर कहते ‘ चुहिया तेल में गिरी’ । लेकिन वरुण और माया ने कभी उसका मजाक नहीं उड़ाया, धीरे धीरे माया की संगत में रहकर थोड़ा स्टाइल तो उसने भी अपना लिया था फिर भी माया से मुकाबला नहीं कर सकती थी। तीन साल कालेज में कहां निकल गए पता ही नहीं चला, उसे सबसे अलग होने का बहुत दुख हो रहा था। पर उसके आश्चर्य का ठिकाना नहीं रहा जब वरुण ने उसके सामने शादी का प्रस्ताव रखा।वह कभी सपने में भी नहीं सोच सकती थी ऐसा कोई चमत्कार होगा लेकिन हां करने से पहले वह माया से पूछना चाहती थी कहीं उसके दिल में वरूण के प्रति प्रेम की भावना तो नहीं।माया ने स्पष्ट कहा कि वह कभी शादी करेंगी नहीं और उन दोनों की शादी से उसको बहुत प्रसन्नता मिलेगी। फिर भूमि को चिंता हुई कि वरुण के मम्मी पापा उसे अपनाएंगे कि नहीं , हैसियत का बहुत बड़ा फासला था। लेकिन उनको तो भूमि इतनी पसंद आई कि झट मंगनी पट ब्याह हो गया। शादी के बाद भूमि का सम्पूर्ण ध्यान का  केंद्र उसकी घर गृहस्थी हो गई और वरूण ने पिता का कारोबार संभाल लिया। सास ससुर ने मां बाप से भी अधिक ममता दी तो भूमि ने भी उनके मान और सेवा में कोई कमी नहीं छोड़ी। सास बड़े प्यार से कहती :” जानती है शादी के पंद्रह साल बाद वरूण पैदा हुआ था, बहुत मन्नतें मांगी तब हुआ। लेकिन बिल्कुल नालायक निकला,दो घड़ी पास नहीं लगता, कोई सुख नहीं दिया।बस तुझे ब्याह कर सारी शिकायत दूर कर दी ,एक बेटी की चाहत थी वह भी पूरी हो गई तेरे आने से।” भूमि की आंखें भीग जाती सास की बातों से,वह और तन्मय होकर उनकी सेवा में लग जाती।

भूमि वरूण की तरफ कम ध्यान देती थी लेकिन उसने कभी शिकायत नहीं की। उसको मेहमानों और दोस्तों को घर लाने का बहुत शौक था , किसी भी समय फोन करके कह देता इतने लोगों का खाना बनाना है।समय के साथ इसका परिणाम यह निकला कि भूमि फटाफट स्वादिष्ट भोजन बनाने में ऐसी निपुण हो गई कि लोग उंगलियां चाटते रह जाते।

दीक्षा के जन्म के बाद भूमि की खुशी दुगनी हो गई लेकिन सासूमां बीमार रहने लगी। उनके गुजरने के बाद भूमि ने महसूस किया ससुर बहुत उदास रहने लगे, बहुत अकेलापन महसूस करते। एक दिन भूमि को अपने पास बुला कर बोले :” बेटा तू बहुत भोली है,तेरी बहुत चिंता रहती है।जब से दीक्षा पैदा हुईं है मेरी चिंता दुगनी हो गई है ‌” भूमि की समझ नहीं आ रहा था पापाजी ऐसा क्यों बोल रहे हैं,वह बोली :” वरूण तो है फिर चिंता की क्या बात है।”

ससुर जी बोले :” बिटिया तू इतनी ममतामई है कि सब पर अंधविश्वास पर लेती है। मैं तो प्रभू से प्रार्थना करता हूं तेरा विश्वास सब पर बना रहे , तुझे कभी कोई तकलीफ़ न हो। मैं ने वकील को बुलाया है अपनी वसीयत बनवाने के लिए।तेरा भविष्य सुरक्षित करना चाहता हूं इसलिए इस मकान में आधा हिस्सा तेरे नाम कर रहा हूं।बस तू मुझ से वादा कर किसी के भी दबाव में आकर तू अपना हक नहीं छोड़ेगी।” भूमि ने ससुरजी को इतना परेशान देखकर वादा कर दिया। एक साल बाद उनका भी निधन हो गया।

वरूण के ऊपर काम की जिम्मेदारी और बढ़ गई ,वो तो गनीमत रही कि उसकी माया से मुलाक़ात हो गई और वह अपनी नौकरी छोड़ कर वरूण के आफिस में काम करने लगी। अब तो जब भी वरूण दोस्तों को दावत पर बुलाता माया भी आती और घर में बहुत रौनक हो जाती। भूमि बहुत खुश थी कि तीनों दोस्त फिर करीब हो गये हैं , वरूण ने माया को फ्लेट भी अपने घर के पास ही दिलवा दिया था।

खाना बनाते हुए भूमि को लगा बाहर लाबी में किसी के रोने की आवाज आ रही है।बाहर आकर देखा तो दीक्षा रो रही थी, उसने आश्चर्य से पूछा :” क्या हुआ मेरी गुड़िया को ,ऐसे क्यों रो रही है? ” दीक्षा को तो स्कूल के बाद माया के घर जाना था, फिर दोनों मिलकर दीक्षा के लिए एक सुंदर सी फ्राक खरीदने जाते। दीक्षा को लगता था माया आंटी की पसन्द बहुत अच्छी है वो कितने सुंदर कपड़े पहनती हैं। लेकिन उसे जल्दी आया देखकर भूमि विचलित हो गई, कहीं दीक्षा की तबियत तो नहीं खराब हो गई।दीक्षा बोल कुछ नहीं रही थी बस रोती जा रही थी,जब भूमि ने प्यार से दो तीन बार फिर पूछा तो वह बोली :” मैं माया आंटी के पास गई थी दरवाजा खुला था इसलिए सीधे अंदर चली गई। वहां पापा भी थे , दोनों हंस रहे थे फिर आंटी ने पापा को किस किया। वो मेरे पापा है न आंटी को ऐसे उनके साथ बिहेव नहीं करना चाहिए था, मुझे बिल्कुल अच्छा नहीं लगा।” भूमि अवाक रह गई, वहीं पड़े दीवान पर बैठ गई। यह दीक्षा क्या कह रही है ,बच्ची झूठ तो नहीं बोल सकती, उसे कोई गलतफहमी हो गई है। लेकिन एक घंटे पहले वरूण ने कहा था वह साईट पर है जहां फ्लेट्स का निर्माण कार्य चल रहा है। चुंकि वह क्षेत्र शहर के बाहरी हिस्से में है तो कम से कम डेढ़ घंटा लगता है वहां से यहां आने में। कहीं ऐसा तो नहीं दुबारा मिलने पर वरूण के मन में माया के लिए प्रेम जाग्रत हो गया हो या शुरू से ही माया को चाहता हो और शादी नहीं कर पाया हो उससे। हे भगवान वह कैसी पागल है छोटी सी बच्ची की बातों में आकर ज़रा सी बात का तिल का ताड़ बना रही है। लेकिन नहीं मन दीक्षा की बातों को नकारने को तैयार नहीं हो रहा था, शायद उसका दिल इस सच्चाई से वाकिफ था,बस आंखें बंद करके उसे अनदेखा करता था। क्यों वरूण की हर बात और इच्छा को पूरी करने में जान लड़ा देती थी, कुछ असुरक्षा की भावना तो मन में अवश्य थी। आज नन्ही दीक्षा ने आंखें खोल दीं,जो गलत था वह इस बच्ची को अच्छा नहीं लगा और वह स्वयं उसे अनदेखा करके अपने मन में सही मान लेती थी।

शायद उसके सास ससुर को सच्चाई दिख रही थी लेकिन वो प्रेम में अंधी बनी हुई थी। उसे अपने आप पर बहुत गुस्सा आ रहा था, उसने निर्णय लिया वह अब और अपने स्वाभिमान को आहत नहीं होने देगी,उसी समय घर छोड़ देगी,स्थिती का अवलोकन करेगी । भविष्य में क्या करना है निश्चित करके ही वरुण के सामने आएगी नहीं तो वह अपनी चिकनी चुपड़ी बातों से उसकी आंखों पर पट्टी बांध देगा।

भूमि ने रसोई में गैस बंद की ,खाना आधा अधुरा जैसा बना था वैसा ही छोड़ दिया और अपने कमरे में जाकर तैयार हो गई। दीक्षा की भी स्कूल यूनिफॉर्म बदली उसे खाना खिलाया और बड़े प्यार से बोली :” आज पापा ने गलत बात की हम उन्हें सज़ा देंगे,हम दोनों जन्मदिन सेलिब्रेट करेंगे पापा को नहीं ले जाएंगे।” फिर उसने भोला को जो सालों से घर में ही रहता था ,को बुलाया और कहा :” वरूण जब पूछे तब ही बोलना कि पता नहीं मैं कहां गयी हूं।”

भूमि दीक्षा को लेकर बाजार गयी उसकी पसंद की सुंदर फ्राक खरीद कर उसे पहना दी। फिर दोनों ने दीक्षा की मनपसंद बच्चों की फिल्म देखी और पिज़्ज़ा खाया। फोन में देखा साढ़े सात बजें थे , वरूण घर पहुंच गया होगा ‌।बिखरा हुआ घर ,आधा अधुरा बना खाना देखकर गुस्से से पागल हो रहा होगा। वह सोच ही रही थी कि उसका फोन बजा, वरूण मिला रहा था, भूमि ने नहीं उठाया,दो बार किया वरूण ने फोन। वरूण सचमुच पागल हो रहा था,आजतक भूमि ने ऐसी लापरवाही कभी नहीं दिखाई थी। उसके साथ माया भी थी उसे भी आश्चर्य हो रहा था भूमि ऐसे कैसे बिना बताए गायब हो गई। वरुण ने भोला को आवाज लगाई ,जब उससे पूछा तो वह तनकर कर बोला :” हमें क्या मालूम बहुरानी कहां गयी है,दीक्षा बिटिया बहुत रो रही थी उसको लेकर चलीं गयी।”

दीक्षा के नाम से माया को याद आया ,” से भगवान !” वह बोली :” आज दीक्षा जन्मदिन की ड्रेस लेने मेरे पास आने वाली थी, मैं तो बिल्कुल भूल गई। तुम उस समय वहीं थे लगता है उसने सब देख लिया इसलिए भूमि गुस्से में घर छोड़ कर चलीं गईं। ” वरुण लापरवाही से बोला :” भूमि को मनाने में मुझे कोई परेशानी नहीं होगी, ज़रा सा मुस्कुरा कर उसकी तारीफ करूंगा , एकदम बिछ जाएगी। लेकिन इस समय क्या करें,इतने सारे मेहमान आने वाले हैं उनको क्या खिलाएंगे? तुम रसोई में जाकर देखो,भोला की मदद ले लो , कुछ ठीक कर सकती हो तो कोशिश कर लो, आज तो इज्ज़त बचा लो।”

माया चिढ़ कर बोली :” तुम्हें लगता है अपनी डिजाइनर ड्रेस रसोई में जाकर खराब करूंगी। उन्हें होटल लेकर चलते हैं वहीं खिला देना।”

वरूण का गुस्सा बढ़ता जा रहा था, उसके खास मेहमान थे । बहुत लाभ होने वाला था इसलिए घर के खाने की प्रशंसा करके उन्हें प्रभावित करने के लिए घर बुलाया था। क्या इज्जत रह जायेगी उनके सामने। वरूण ने दुबारा भूमि को फोन मिलाया,इस बार उसने फोन उठा लिया,वह चिल्लाया :” कहां हो तुम , दिमाग खराब हो गया है जो इस तरह खाना आधा बना छोड़कर बिना बताए चली गई।”

भूमि शांत स्वर में बोली :” दीक्षा का जैसे जन्मदिन मनाने का निर्णय लिया था वैसे ही सेलीब्रेट कर रहीं हूं। कल दस बजे घर पर रहना आगे की बात तब करेंगे।” और उसने फोन काट कर स्विच ऑफ कर दिया।

भूमि दीक्षा को लेकर अपनी बड़ी बहन सुमन के यहां चली गई, मां पिताजी के पास जाती तो वो इतने विचलित हो जाते कि वह ठीक से कुछ सोच नहीं पातीं। घर में जब सब सो गए,तब भूमि ने अपनी बहन को सब बातें बताई, फिर बहुत देर तक रोती रही,कब से अपने आप पर नियंत्रण रखा हुआ था। जब वह रोते हुए थक गयी तब सुमन उससे प्यार से बोली :” अब आराम कर कल सोचते हैं आगे क्या करना है।” लेकिन भूमि की आंखों में नींद कहां थी? सुबह नाश्ता करके जब भूमि चलने लगी तब सुमन ने धीरे से पूछा :” अब क्या करेगी, कहां जाएगी?” भूमि ने दृढ़ निश्चय के साथ कहा:” कहां जाऊंगी? वहीं रहुंगी और वरूण को सबक सिखाऊंगी।”

वरूण को रात को बड़ी शर्मिंदगी उठानी पड़ी, आखिरी वक्त पर किसी अच्छे होटल में इतने सारे लोगों की व्यवस्था हो नहीं सकीं। मेहमानों की उम्मीद पूरी नहीं हुई तो उन्होंने अपनी नाराज़गी प्रकट करने में कोई शर्म नहीं की, उसे बहुत बड़ा नुक़सान हुआ। वह माया के साथ भूमि का इंतजार कर रहा था , उसे यकीन था भूमि को वह आसानी से मना लेगा ,यह कोई मुश्किल काम नहीं था।

भूमि ने जब घर में प्रवेश किया तो दोनों को देख कर उसे कुछ घबराहट हुई लेकिन दोनों का छल  याद कर उसे क्रोध आया। उसने जब कड़े तेवरों के साथ माया से कहा :” माया इस वक्त तुम्हारी यहां आवश्यकता नहीं है, मुझे अपने पति वरूण से अकेले में बात करनी है ।” तो माया भी सहम गई भूमि का यह रूप देखकर। उसके जाने के बाद भूमि वरुण से बोली :” यह सब कब से चल रहा है, अनजान बनने का नाटक मत करना मैं समझ गई हूं तुम्हारा माया के साथ क्या रिश्ता है।”

वरुण मुस्कुराते हुए आवाज में मिश्री घोलते हुए बोला ,” जाने मन तुम न जाने क्या समझ रही हो , मैं ने हमेशा तुम से प्यार किया है इसलिए तुम से शादी की थी। मुझे एक कॅंट्रेक्ट मिला था वही बताने उसके घर गया था।”

भूमि :” कितना झूठ बोलोगे वरुण ,वह तुम्हारे आफिस में काम करतीं हैं ,यह बात बताने के लिए उसके घर जाने की क्या आवश्यकता थी। यहां आने से पहले मैं माया के घर गई थी वहां मैं ने चौकीदार को धमका कर जब प्रवेशद्वार पर रखे रजिस्टर को देखा तो तुम्हारा नाम अक्सर एक बजे से लेकर तीन बजे तक वहां नामांकित था । तुमने इस तथ्य को रजिस्टर में छुपा ने की भी कोशिश नहीं की , तुम्हें लगा बेवकूफ औरत सारा दिन घर गृहस्थी में लगी रहती है उसे क्या पता चलेगा कभी।”

अब वरुण गुस्से में बोला :” तुम मेरी जासूसी कर रहीं थी, तुम अपने आप को समझती क्या हो?”

भूमि वरुण को घूरते हुए बोली :” बहुत खूब , तुम कुछ भी करो ,धोखा दो , और मैं सत्य पता करूं तो जासूसी क्यों की। हां की जासूसी ,अब तुम स्पष्टीकरण देना चाहो तो दे सकते हो,क्यों किया तुमने ऐसा , नहीं तो मेरा निर्णय सुन लो।”

वरूण हड़बड़ा कर बोला,” सुनो मेरी बात सुनो प्लीज , कुछ भी निर्णय लेने से पहले सुन लो। मैं कालेज में ही माया को चाहने लगा था लेकिन वह शादी नहीं करना चाहती थी दूसरे उसको मम्मी पापा ने भी स्वीकार नहीं किया। जब वे उससे मिले तो उन्होंने स्पष्ट कहा कि न तो वह हमारी जाति की है और न ही उसका पहनावा और रहन सहन उन्हें रास आया। अगर मैं ने उससे शादी की तो पापा मुझे जायदाद से बेदखल कर देंगे। ”

भूमि :” तुम उससे शादी के बाद भी मिलते रहे लेकिन छुप छुप कर,जब पापा की डेथ हो गई तो उसे खुलेआम अपने आफिस में नौकरी दे दी और अपने घर के पास फ्लेट दिलवा दिया।”

वरुण :” तो क्या करता उन्होंने चेतावनी दी थी अगर मैं उसके साथ नजर भी आया तो वो सारी जायदाद का ट्रस्ट बना देंगे ।”

भूमि  :” तुम कितने खुदगर्ज इंसान हो ,अगर माया से सचमुच इतना प्यार करते थे तो सब कुछ कुर्बान कर देते या फिर तुम और माया मिलकर मम्मी पापा को विश्वास दिलाते उनके लिए अपने आप को बदल लेते। तुम ने बस अपने बारे में सोचा और पग पग पर सब को धोखा दिया। खैर मैंने निर्णय ले लिया है अब हमारे मध्य कोई रिश्ता नहीं रहेगा । तुम जब चाहो तलाक के कागजात तैयार करवा लेना।”

वरुण :” तुम जाओगी कहां?”

भूमि :” मैं कहां जाऊंगी? यहीं रहुंगी, पापाजी ने इस मकान में आधा हिस्सा मेरे नाम कर रखा है । मैं ग्राउंड फ्लोर लुंगी और इस बड़े से हाल को रेस्टोरेंट बनाऊंगी,जिसका नाम होगा ‘ भूमि की रसोई’ ।जिसको भी घर का बना पौष्टिक स्वादिष्ट खाना चाहिए होगा वो यहां पर खाने आएगा। बुजुर्गो के लिए खास सुविधाएं दूंगी। लेकिन मैं यह सब तुम्हें क्यों बता रही हूं।”

वरुण गुस्से से उसकी ओर लपकते हुए चीखा :” तुम ऐसा कुछ नहीं करोगी। वैसे भी इतनी बड़ी हवेली टाइप घर की किसी को भी आवश्यकता नहीं है, मैं इसे तोड़ कर यहां बहुत ऊंची बिल्डिंग का निर्माण करूंगा, जिसके सारे फ्लेट्स बेचूंगा और सबसे ऊपर एक पेंट हाऊस रखूंगा जहां हम रहेंगे।”

भूमि :” तुम ऐसा कुछ  नहीं कर सकोगे क्योंकि मैं दस्तख़त नहीं करूंगी।”

वरुण :” देखो भूमि मैं तुमसे माफी मांगता हूं, मैं माया से भी सारे रिश्ते तोड़ दूंगा।”

भूमि :” माया से शादी कर लो , अपने प्यार को मंजिल दो, किसी रिश्ते को तो इमानदारी से निभाओ ।”

भूमि ऊपर चली गई कमरे में से अपना सामान लाने। वरुण इन तीन चार साल में यह समझ गया था कि माया के साथ दो तीन घंटे मस्ती में बिताना और बात है लेकिन हर समय उसके साथ रहकर गृहस्थी बसाना बहुत कठिन है।वह पस्त हारे हुए इंसान की तरह वहीं बैठा रह गया।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *