मासूमियत

Maasoomiyat

तेरह वर्षीय रीमा पिता के साथ स्कूटी पर घर जा रही थी कि रास्ते में स्कूटी खराब हो गई। स्कूटी ठीक होने में समय लगता इसलिए उसके पिता ने उसे बस में बिठा दिया। रीमा को थोड़ी घबराहट हो रही थी पहली बार बस में अकेले सफ़र करते हुए ‌। लेकिन पिता ने हिम्मत बढ़ाते हुए कहा कि तीन चार स्टाप छोड़कर उतरना है कोई परेशानी नहीं आएगी।बस में चढ़ते ही उसकी निगाह एक बिल्कुल खाली सीट पर पड़ी तो लपक कर वह खिड़की के पास वाली सीट पर बैठ गई।बस में भीड़ बढ़ती जा रही थी तभी तीन बीस इक्कीस साल के लड़के चढ़े।वे आपस में तेज आवाज में बात कर रहे थे और उनके हर वाक्य में गालियों का बोलबाला था। उनके इस अंदाज से रीमा की घबराहट बढ़ती जा रही थी कि कहीं उनमें से कोई उसकी बगल वाली ख़ाली सीट पर न आकर बैठ जाएं। तभी एक बुजुर्ग उन्हें एक तरफ धकेलते हुए आएं और उसकी बगल वाली सीट पर बैठ गए।

रीमा की जान में जान आई,अब उसने अपना ध्यान खिड़की के बाहर केंदित कर लिया कहीं उसका  बस स्टाप न निकल जाए। वो तीनों लड़के उधर ही खड़े हंस बोल रहे थे। जब रीमा का गंतव्य आ गया तो वह उठी और अपनी सीट से बाहर निकलने लगी। बुजुर्ग की तरफ उसकी पीठ थी और वह  बुजुर्ग के आगे से होती हुई उतरने वाली भीड़ में शामिल होने लगी। तभी बुजुर्ग के हाथ ने सांप से रेंगते  हुए उसकी कमर से होते हुए उसकी छाती को जोर से दबोच लिया। रीमा की दर्द के मारे चीख निकल गई जिसे उसने अपनी मुट्ठी को मुंह पर रख कर दबा ली। लेकिन आंखों में आसूं आ गए और शरीर शिथिल हो गया। पास खड़े लड़के की नजर उस पर थी, उसने लपक कर बुजुर्ग के सरकते हाथ को पकड़ लिया और जोर से मोड़ते हुए गुस्से में बोला :” दद्दू कुछ तो शर्म की होती अपनी और इस बच्ची की उम्र की। पहले ही धरती पर युद्ध छिड़ा हुआ है स्त्री पुरुष में विश्वास को लेकर और तुम्हारी ऐसी ओछी हरकत उस मासूम को कभी भी किसी पर विश्वास नहीं करने देगी ।”

बुजुर्ग तैश में आकर खड़ा हो गया :” एक बुजुर्ग आदमी से इस तरह बात करते हुए तुम्हें शर्म नहीं आती । मैं तो उसे भीड़ में गिर न जाए इसलिए थाम रहा था ।”

बस में भीड़ ठहर सी गई थी और तीन हट्टे कट्टे लड़कों को अपनी ओर घूरता देख बुजुर्ग ने पैंतरा बदला:”माफ करना बेटी मुझसे गलती हो गई।”

बोझिल कदमों से रीमा आगे बढ़ कर बस से उतर गई।  उसकी मासूमियत वहीं दरक कर बिखर गई। दिमाग में एक बात घूम रही थी हर बार उसकी मदद करने कौन आएगा,स्वयं को ही मजबूत बनना होगा।

6 thoughts on “मासूमियत

  1. दुःखद…. आज का दौर ऐसा ही हो गया है… स्वयं को ही मजबूत और जागरूक होना होगा…..समय परिवर्तित हो रहा है जवानों से ज्यादा बुजुर्ग अधेड़ उम्र के लोग खराब हो गए हैं…..

    हृदय स्पर्श कहानी..

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