संघर्ष

sangharsh

जिया बारहवीं की पढ़ाई को लेकर बहुत उत्साहित थी, ग्यारहवीं में कक्षा में सबसे अधिक अंक प्राप्त करने के कारण आत्मविश्वास से लबरेज। होशियार और मेहनती थी , निश्चय कर लिया था इंजीनियरिंग की प्रवेश परीक्षा में अवश्य सफल होगी। लेकिन उसे कुछ दिन से महसूस हो रहा था हरित उसके आसपास मंडरा रहा है जैसे कुछ कहना चाहता हों। वैसे हरित उसका प्रतिद्वंद्वी था ,अक्सर बहस रहती थी दोनों के बीच, एक दो अंक आगे पीछे रहते थे। ग्यारहवीं में उससे अच्छे अंक आए थे इसलिए जिया को पूरा विश्वास था इस बार हरित उससे और अधिक खुन्नस खाएगा और बात बात पर झगड़ा करेगा।

लेकिन इस साल हरित के तेवर ही बदले हुए थे। जिया को अपनी ओर ताकता देख हरित बोला :” जिया मुझे कुछ भौतिक के सवालों में परेशानी आ रही है ,तू समझा देंगी क्या?’

जिया को आश्चर्य तो बहुत हुआ हरित के बरताव पर  लेकिन किसी को ना करना उसने सीखा नहीं था और कोई मदद मांगे तो वह पीछे हटती नहीं थी। जिया ने सवाल हल करके दिया तो हरित खुश होते हुए बोला :” थैंक्स यार ,तू नहीं जानती मुझे इन्हें समझने में कितनी परेशानी हो रही थी। ” हरित की बात जिया को पच नहीं रहीं थी,सवाल बहुत मुश्किल नहीं था और हरित होशियार छात्र था। खैर उसे देर हो रही थी , कोचिंग भी जाना था इसलिए वह तुरंत रिक्शा लेकर घर चली गई।

जिस कोचिंग में जिया जाती थी हरित भी वहीं जाता था। कक्षा खत्म होने के बाद बोला ,” जिया चल तुझे बर्गर खिलाता हूं , तूने मुझे आज पढ़ाया था ।”

जिया :” नहीं रहने दें , तेरे चक्कर में मेरी कैब छूट जाएगी।” हरित नहीं माना बहुत जिद करता रहा,” मैं तुझे स्कूटी पर छोड़ दूंगा बाद में ,चल न प्लीज़।” जिया मान गई।

कईं दिन से जिया को लग रहा था हरित उससे बहुत अच्छे से बोल   रहा था ,कक्षा और कोचिंग में भी उसके बगल वाली सीट पर आकर बैठ जाता। पढ़ाई में भी उससे सलाह मशविरा करता रहता था। जिया को हरित का इस तरह ध्यान रखना अच्छा लगने लगा। जन्मदिन वाले दिन वह स्कूल तो यूनीफोर्म में ही गई लेकिन कोचिंग में नयी ड्रैस पहनी। और लड़कियों की तरह वह मेकअप तो नहीं करती थी लेकिन कान में लटकने वाले पहन लिए। उसको देखते ही हरित बोला  :” वाह आज तो तू गज़ब लग रही है। ” वह उसके लिए चाकलेट और ब्रेसलेट लाया था। उस दिन उसका मन पढ़ाई में बिल्कुल नहीं लगा ,शिक्षक क्या पढ़ा रहे थे उसे सुनाई नहीं दिया। वह बस हरित के बारे में सोचती रही। कोचिंग के बाद हरित कुछ दोस्तों के साथ उसे लेकर पेस्ट्री शाॅप पर गया और केक कटवाया। जिया को विश्वास नहीं हो रहा था कोई उसके लिए इतना कुछ कर सकता है,वह हरित की दिवानी सी होती जा रही थी।

अब जिया का मन सजने संवरने का करता था ,आज तक किसी लड़के ने उसकी तरफ इस तरह से ध्यान नहीं दिया था। सब उससे पढ़ाई में सहायता अवश्य लेते थे इसलिए अच्छे दोस्त थे, लेकिन जो अहसास हरित ने जाग्रत कर दिए थे वह आज तक उनसे अनजान थी। अब कोचिंग में जाती तो ड्रेस और  मेकअप को लेकर परेशान रहती,स्वयं तो उसके पास कुछ फैशन के मुताबिक था नहीं खास। अपनी छोटी बहन रेवा का सामान निकाल कर इस्तेमाल कर लेती। रेवा उसपर चिल्लाती :” जिया तू पागल हो गई है,कुछ भी मुंह पर पोत कर चल देती है , तुझे पता भी है यह शेड्स तुझ पर नहीं जंचते,तेरा काम्पलेक्शन मुझ से अलग हैं।” जिया को लगता रेवा ने  उसका हमेशा मजाक ही उड़ाया है इसलिए उसकी बात अनसुनी करना ही ठीक है। हरित उसकी हर बदलाव पर दिल खोलकर प्रशंसा करता और वह निश्चित हो जाती।

अर्द्ध वार्षिक परीक्षा में जिया के अंक कुछ कम आये, लेकिन हरित अव्वल आया था और वह बहुत खुश थी। उसे पूरा यकीन था आगे मेहनत करके वह अपना स्कोर बढ़ा लेगी। हरित जिया के दिल में बसता जा रहा था।‌उसके जन्मदिन पर जिया उसके लिए घड़ी लेकर गयी तो हरित उसे अकेली को आईसक्रीम पार्लर ले गया ‌। वहां दोनों ने एक एक कोण लिया। जब जिया ने आधी आईसक्रीम खाली तो हरित उसके हाथ से उसका कोण लेते हुए बोला ,” थोड़ी सी मुझे चखा़ , मैं किस तो नहीं कर सकता यहां लेकिन तेरी झूठी आईसक्रीम खा़ कर किस का अहसास तो कर ही सकता हूं।”

जिया पूरी रात सो नहीं सकीं,रह रहकर हरित की कही बात कानों में गूंजती रही।आंख लगती तो उसका चेहरा नजर आता ,बस अब तो उसके बारे में सोचना ही अच्छा लगता। पढ़ाई से मन बिल्कुल उचट गया। घर में किसी को फुर्सत नहीं थी यह देखने कि की वह क्या कर रही है क्या नहीं। पिता व्यापार की उधेड़बुन में व्यस्त रहते तो मां स्नेहलता गपशप और किटी पार्टी में। परीक्षा फल में जिया के जब अच्छे अंक आते तो सहेलियों में डींगे मारने का एक विषय अवश्य मिल जाता। बहन रेवा के मन में उसके बौद्धिक स्तर को लेकर ईर्ष्या थी इसलिए उसके पहनावे और साधारण शक्ल सूरत के लिए नीचा दिखाने में कभी पीछे नहीं रहती।

जिया अपनी ही कल्पना की दुनिया में विचरते हुए कब शैक्षणिक स्तर पर पिछड़ती चली गई उसे भान ही नहीं हुआ। प्रिबोर्ड का परिणाम जब घोषित हुआ तब उसे होश आया वो दो विषयों में अनुत्तीर्ण थी तो दो विषयों में बस किसी तरह उत्तीर्ण होने लायक अंक प्राप्त किए थे। उसे अपनी आंखों पर विश्वास नहीं हो रहा था,आज तक नब्बे प्रतिशत से अधिक अंक लाती थी और इस बार पास होने के लाले पड़ रहें थे। उसने सोचा हरित से बात करनी चाहिए,शायद उसकी मदद से वह एक महीने में ध्यान से पढ़कर अपने अंक सुधार लें।

हरित का फाइनल प्रेक्टिकल था इसलिए जिया प्रयोगशाला की ओर चल दी। छात्र छात्राएं बाहर आने लगे थे इसका मतलब प्रेक्टिकल खत्म हो गया था । उसने खिड़की से झांका हरित अपने तीन साथियों के साथ अंदर ही था, उनमें एक यामिनी भी थी जो ग्यारहवीं कक्षा तक हर समय हरित के साथ रहती थी और सब उसे हरित की गर्लफ्रेंड कहते थे। जिया दरवाजे से अंदर घुसने ही वाली थी कि उनकी आवाज सुनकर ठिठक गयी। चारों ज़ोर ज़ोर से हंस रहे थे, यामिनी चहकते हुए बोल रही थी :” यार अब तेरा मकसद पूरा हो गया है ,उस बहनजी से पीछा छुड़ा‌। तुझे पता है तुझसे दूर रहना मेरे लिए कितना मुश्किल है। ”

हरित :” मेरे लिए क्या आसान था उसको सहन करना, बेवकूफों की तरह तैयार होकर आती और मुझे झूठी तारीफ करनी पड़ती। अपने  जन्मदिन पर तो उसकी झूठी आईसक्रीम खाने के बाद मुझे इतनी उबकाई आयी थी। खैर मेरा बदला पूरा हो गया, मुझसे अच्छे अंक लाकर वह सोच रही थी वह जीत गई। लेकिन मुझसे आगे कोई निकल जाए यह मैं बर्दाश्त नहीं कर सकता। ”

जिया को विश्वास नहीं हुआ यह सब सुनकर कि हरित की दिलचस्पी उसमें केवल एक नाटक थी। उसे हरित से अधिक अपने आप से घृणा हो रही थी कि कितनी बेवकूफ है बेकार के चक्कर में पड़ कर अपना जीवन अपना भविष्य बर्बाद कर दिया। तभी हरित की नजर उस पर पड़ी , हंसते हुए बोला :” लो इसने तो सब सुन लिया , आगे कोई नाटक करने की आवश्यकता नहीं अब सच्चाई बताने के लिए।” तीनों साथी बाहर आने लगे , यामिनी उसकी तरफ टेढ़ी मुस्कान फेंकते हुए इतरा कर चलीं गईं। जिया हतप्रभ सी हरित को देखते हुए बोली :” कुछ अंकों के लिए कोई इतना नीचे गिर सकता है , इतनी घिनौनी हरकत कर सकता है , मैं सपने में भी नहीं सोच सकती । आज से दस साल बाद क्या फर्क पड़ेगा चार पांच अंक तुम्हारे अधिक आएं या मेरे। लेकिन इस हरकत से तुम्हारी  आत्मा पर जो धब्बा लगा है वो कभी नहीं जाएगा।”

जिया घर पहुंची तो कोई नहीं था घर में , बिना कुछ खाए पीए अपने कमरे में लेटी बस रोती रही। शाम को स्नेहलता आई ,टेबल पर पड़े परीक्षा फल को देखा और जिया पर बरस पड़ी। ” तुझे शर्म नहीं आती इतने कम अंक लेकर आई है। अभी तक तो इतने अच्छे नंबर लाती थी और अब जब अच्छे अंक लाना इतना आवश्यक है तो फेल हो गई। मेरी तो नाक कटवा दी,सब मेरी हंसी उड़ाएंगे अब,इस साल ही ढिसरना था तुझे।” जिया चुपचाप सुनती रही बहुत पस्त महसूस कर रही थी , कुछ खाया भी नहीं था सुबह से। जब पिता घर आएं तो घर में इतना सन्नाटा था जैसे सब मातम मना रहे हो।जब कारण पता चला तो सिर पर हाथ फेरते हुए बोले  :” पहले कुछ खा ले फिर एक महीना है अभी ध्यान से पढ़ेंगी तो अच्छे अंक आ जाएंगे।”

हफ्तांत था तो दो दिन जिया घर में ही रही, सोमवार को भी नहीं जाती लेकिन उसका प्रेक्टिकल का इम्तेहान था, जाना पड़ा।स्कूल में पैर रखते ही समझ गई यामिनी ने अपना काम कर दिया है,एक एक छात्र छात्राओं को बता दिया है हरित और जिया की एक तरफा प्रेम कहानी के बारे में। सब उसकी तरफ देखकर खुल कर हंस रहे थे और वह शर्म से पानी-पानी हो रही थी।

कईं बार अपने ही सहपाठी कितने संवेदनहीन हो जातें हैं, किसी की मनःस्थिति को समझने की कोई चेष्टा नहीं। जब कोई सवाल समझना होता था या नोट्स लेने होते थे तब कितना दोस्ताना व्यवहार होता था। उसका दिमाग प्रेक्टिकल में नहीं लगा ,शिक्षक भी झुंझला गए ,” बेटा ध्यान किधर है आपका ,ठीक से करो‌?”

घर पहुंचने में थोड़ी देर हो गई , मां और रेवा साथ बैठे थे ,समझ गई उसकी राम कहानी यहां भी पहुंच गईं हैं। उसको देखते ही स्नेहलता गुस्से से बोली :” तो इसलिए नंबर कम आये है , इश्क का भूत सवार हो गया था महारानी के सिर पर ।”

रेवा :” क्या तुने आज तक अपनी शक्ल नहीं देखी आइने में,जो हरित जैसे हैण्डसम लड़के से इश्क लड़ाने चली थी।”

मां की शय पर रेवा को जिया के बड़े होने का कोई लिहाज नहीं था । जिया का अन्तर्मन रो रहा था ,क्या सुंदर नहीं हूं तो सपने देखने का हक नहीं है, प्रेम को अहसास करना पाप हो गया। ठीक है समय गलत था ,इस समय उसका लक्ष्य उसकी पढ़ाई होनी चाहिए थी लेकिन कोई हरित को दोषी नहीं मान रहा था। ग़लत मकसद से उसने उसके भोलेपन और कोमल दिल का इस्तेमाल किया, फिर भी अपराधिनी उसको मान रहे थे। किसको क्या समझाए क्या सफाई दे , चुपचाप अपने कमरे में चली गई। दिल पर इतना आघात लगा था कि चाह कर भी पूरी एकाग्रता से आगे पढ़ाई नहीं कर सकीं।

परीक्षा फल आने वाला था हमेशा की तरफ इस बार उत्साहित नहीं थी। बुआ कामाक्षी भी आई हुई थी, उनके सामने इस बार इतने कम अंक आएंगे, सोचकर ही शर्म आ रही थी। जैसा जिया को अंदेशा था वही हुआ,कम्पुटर पर अपना परीक्षा फल देखकर बहुत निराश हुईं। बस किसी तरह उत्तीर्ण हुईं थीं। स्नेहलता ने माथा पीटना शुरू कर दिया :” कितनी उम्मीद लगा रखी थी इससे, पढ़ लिख कर अपने पैरों पर खड़ी हो जाती तो शायद कोई लड़का नौकरी के लालच में इससे शादी कर लेता। इतने कम अंक में अब आगे कहां किसी अच्छे कोलेज में इसे दाखिला मिलेगा। कोचिंग के पैसे भी फूंक दिये , कोई फायदा नहीं हुआ। शक्ल सूरत है नहीं पढ़ाई में भी ठन ठन गोपाल,अब तो बस छाती पर मूंग दलेगीं।”

कामाक्षी गुस्से से स्नेहलता का मुंह ताक रही थी, उसे अपनी भाभी थोड़ी नासमझ तो शुरू से ही लगती थी। लेकिन अपनी बच्ची को कोई इस तरह कैसे कोस सकता है। वह सख्ती से बोली :” स्नेहलता तुमने हद कर दी है,इस समय बच्ची को तुम्हारे प्रेम और सहारे की आवश्यकता है ना कि तानों की। वह स्वयं कम अंक आने के कारण इतनी दुखी हैं और तुम लज्जित करके उसका मनोबल और कम कर रही हों। आगे बहुत रास्ते हैं वह कुछ और कर लेगी। जहां तक सुंदरता की बात है हमारे सामाजिक मापदंड के अनुसार ज़रा सा रंग साफ हो और थोड़ी फिगर ठीक हो कोई भी उचित रखरखाव से अच्छा दिख सकता है।”

किसी भी तू तड़ाक में हिस्सा न लेना स्नेहलता की शान के खिलाफ था। वह गुर्राई ” जिज्जी आप तो रहने दो, इतना बड़ा पार्लर चलाती हो,जिजाजी भी इतने बड़े कालेज में प्रोफेसर हैं,एक ही पुत्र हैं वह भी एक दो साल में कमाने लगेगा।आप क्या जानों दो लड़कियों की मां को कितनी चिंता होती है जब आमदनी ज्यादा नहीं होती है।”

कामाक्षी:” रहने दें इतनी चिंता होती तो इस तरह पहनने ओढ़ने और किटी पार्टी में पैसे लुटाती नहीं फिरती। जब बच्ची के कम अंक आने शुरू हुए थे तभी सजग हो जाती तो उसे भटकने से बचा सकतीं थीं। चल री लाड़ो मेरे साथ चल ,दो साल का का पार्लर का डिप्लोमा कोर्स करना और मेरे पार्लर में काम करके हाथ साफ करना फिर देखना तेरे पीछे लोग भागेंगे। इंसान में अपने अंदर हुनर पैदा करने की देरी हैं.. ।”

स्नेहलता बीच में बोल पड़ी :” हां हां ले जाएं, अपने पार्लर में मुफ्त काम कराओगी और हम पर अहसान जताओगी।”

कामाक्षी :” बस बहुत हो गया , तेरी तो जितनी छोटी सोच है न , भगवान ही मालिक है। ” उसके बाद दोनों एक दूसरे को टेढ़ी नजरों से घूरती रही और बड़बड़ाती रही। आधे घंटे में ही कामाक्षी , जिया के साथ भोपाल जाने वाली बस में बैठी थी । इंदौर से भोपाल पहुंचने में उसे पांच साढ़े पांच घंटे लगेंगे, रास्ते भर चिंता लगी रहीं तब तो जोश में आकर यह कदम उठा लिया अब आगे क्या होगा। स्नेहलता से झगड़े की उसे परवाह नहीं थी , ऐसा तो दोनों के बीच अक्सर होता रहता था । दो तीन महीने बाद जब स्नेहलता को सौंदर्य प्रसाधन की सामग्री की आवश्यकता होगी बड़े प्यार से फोन करके बोलेगी,” जिज्जी ,ये क्रिम और लिपस्टिक आपके पास फालतू हो तो इस बार जब आओ तो लेती आना। ”

कामाक्षी के पास फालतू तो कुछ नहीं होता था, लेकिन मौके की नजाकत देखते हुए तुरंत हां करके इधर उधर की बातें शुरू कर देती। मायके के नाम पर यही इकलौता भाई का घर था इसलिए ऐसे बरताव करती जैसे कुछ हुआ ही न हो। एक दो दिन के लिए मिलने भी चली जाती , जानती थी इससे अधिक स्पष्ट बुलावा मिलने से रहा। चिंता उसे अपने पति महादेवन की तरफ से ही रही थी, वैसे तो कालेज में प्रोफेसर थे ।सारे दिन किताबों में घुसे रहते थे और बड़े उसूल पसंद थे लेकिन बिना पूछे इस तरह लंबे समय के लिए भतीजी को घर लाने के नाम पर कोई हंगामा न खड़ा कर दे।

जिया को देखते ही कामाक्षी का पुत्र मयूर खुश होता हुआ बोला :” और मोटी कैसी है? बारहवीं का रिजल्ट आ गया पार्टी कब देगी, हमेशा की तरह अच्छे अंक प्राप्त हुएं होंगे।” कामाक्षी ने आंखें दिखाकर उसे चुप कराया और जिया का सामान  गेस्ट रूम में रख दिया। उसके सिर पर प्यार से हाथ रखते हुए बोली ,”बेटा  परेशान मत हो,समय के साथ सब ठीक हो जाएगा।” जिया ने सिर नहीं उठाया बस हामी भर दी आंखों में आंसू भरे पड़े थे।

कामाक्षी ने कमरे से बाहर आकर पति और पुत्र के सब बातें बताई तो महादेवन बोले :” यह तुमने बिल्कुल ठीक किया , माहौल बदलेगा तो जिया का दिमाग स्थिर होगा। ठीक से रिलेक्स होकर आगे की सोच सकेंगी। इस समय उसकी क्या हालत है मैं समझ सकता हूं,जरा से अंक कम आते हैं तो लोगों की प्रतिक्रिया बच्चों का मनोबल बिल्कुल तोड देती है।” कामाक्षी ने राहत की सांस ली।

रात को खाने की टेबल पर जिया झिझकते हुए बैठी, लेकिन जब तीनों इधर उधर की बातें करते रहे तो वह सहज हो गई। बाद में महादेवन उससे बोले ,” बेटा तुम्हारे पास दो विकल्प हैं या तो एक साल फिर जमकर बारहवीं और एंट्रेंस की तैयारी करो और परीक्षा दो या अपनी बुआ का सुझाव मान कर कोई कोर्स कर लो ‌। आराम से सोच कर बिना दबाव के जो तुम्हें उचित लगे वह करो।” जिया का मन पढ़ाई से उचट गया था उसनेे ब्यूटीे पार्लर के  दो साल के डिप्लोमा कोर्स में दाखिला ले लिया। इस काम में मयूर ने उसकी सहायता की और उसे अपने दोस्तों से मिलवाया जिनमें लड़के और लड़कियां शामिल थे। वो सब जिया से बड़े प्यार से मिले और उसका मन लगाने के लिए घूमने का कार्यक्रम बना लेते।

जिया बहुत जल्दी उनके साथ सहज हो गई, उसे लगता उन सब में आहुक उसका विशेष ध्यान रखता था। उसने पढ़ाई छोड़ दी थी और अपने पिता का व्यवसाय संभालता था। उसके पिता ने अधिकतर बड़ी कंपनियों की सौंदर्य प्रसाधन की सामग्री की एजेंसी ले रखी थी और कामाक्षी के पार्लर में वहीं से सामान आता था। जिया सुबह कालेज जाती थी और तीन बजे से कामाक्षी के पार्लर में काम करती,सबको काम करते हुए बड़े ध्यान से देखती। लेकिन वह उदास रहती थी कहीं न कहीं मन में यह बात कचोटती की वह जीवन में असफल रही ‌ कहां वह इंजीनियरिंग की डिग्री लेती किसी बड़ी कंपनी में नौकरी करती, विदेश जाती और कहां वह पार्लर के कोर्स में डिप्लोमा कर रही हैं।

जब से जिया ने पार्लर में काम करना शुरू किया था आहुक स्वयं सामान पहुंचाने आने लगा था। कुछ न कुछ सामान जानबूझकर नहीं लाता जिससे बार बार आने का कारण बना रहे । कामाक्षी झुंझलाती,न जाने कैसे काम करता है यह लड़का हमेशा कुछ न कुछ भूल जाता है, पहले तो ऐसा कभी नहीं होता था।

एक दिन जिया को अकेली और खाली बैठे देखा तो आहुक ने उससे काफी पीने के लिए चलने को कहा। जिया मान गई उसका पार्लर में मन नहीं लग रहा था। काफी का आदेश देकर आहुक बोला :” जब भी कोई दुर्घटना घटती है शरीर और दिल पर अपने निशान छोड़ती है ‌। इंसान को हिम्मत से आगे बढ़ना चाहिए और लगन से जो भी काम कर रहे हो उसे अंजाम देना चाहिए। ”

जिया का मन पहले ही बोझिल हो रहा था आहुक की बातों से उसे झुंझलाहट होने लगी। वह जानती थी कि मयूर ने अपने दोस्तों को उसके बारे में संक्षेप में बता रखा था इसलिए वह समझ गई आहुक किस विषय में बोल रहा था। उसको आहुक का इस तरह उसके व्यक्तिगत जीवन के बारे में भाषण देना अच्छा नहीं लगा ,जिस पर बीतती है वही अपनी तकलीफ़ समझ सकता है।

जिया ने लम्बी सांस लेते हुए कहा :” सब जानती हूं लेकिन क्या करना चाहतीं थीं और क्या कर रही हूं।”

आहुक :” मैं ने बहुत ऊंचे सपने देखे थे ,बड़ा घमंड था जो चाहुंगा हासिल कर लूंगा। ग्यारहवीं बारहवीं दो साल बहुत मेहनत की थी ,पूरा यकीन था बढ़िया से कालेज में दाखिला मिल जाएगा। लेकिन परीक्षा के बाद दोस्तों के साथ मस्ती में बहुत तेज बाईक चलाते हुए हादसा हो गया। डेढ़ साल तक बिस्तर पर पड़ा रहा,जिस कालेज में दाखिला चाहता था मिल गया पर पढ़ने की हालत में नहीं था। इन डेढ़ साल में जिंदगी की कीमत समझ में आयी ,एक पैर में राड़ पड़ी है चलने में तकलीफ़ होती है। अभी भी कभी कभी बहुत दर्द होता है ,सब की तरह तेज नहीं भाग पाता हूं ,शरीर पर निशान हैं लेकिन शुक्रगुजार हूं नियती का जिंदा हूं अपने लायक हूं।”

जिया की आंखों में आंसू आ गए ,वो नहीं जानती थी आहुक इतना कुछ अपने जीवन में सहन कर चुका है। वह बहुत हंसमुख और सबकी मदद करने को तत्पर रहता था।

जिया धीरे से बोली :” मुझे नहीं पता था आपके साथ इतना बड़ा हादसा हो चुका है।”

अमुक :” मैं यह सब तुम्हारी सहानुभूति प्राप्त करने के लिए या भाषण देने के शौक को पूरा करने के लिए नहीं कर रहा हूं ‌। मुझे लग रहा है तुम अभी भी अपने पास्ट में अटकी हुई हों और वर्तमान को बेमन से जी रही हों। कुछ भी ऐसा मत करो कि बाद में पछतावा हो।जीवन एक बार मिलता है ,अगर यह कोर्स पसंद नहीं आ रहा है तो दुबारा पढ़ाई शुरू कर दो, लोगों की चिंता मत करो कि क्या कहेंगे।”

जिया :” नहीं काम तो मुझे अच्छा लग रहा है ,रोज़ नये लोगों से मिलना होता है, उनकी भावनाओं को समझने का मौका मिलता है ।बस लगता है मैं कहीं असफल रही।”

अमुक :” यह हमारे मन का वहम होता है , कोई भी सफल या असफल नहीं होता है । हमारे अपने बनाएं हुए  मापदंड होते हैं,कुदरत की नजरों में सब बराबर होते हैं। मेरी नज़र में जो गलत काम करता है जिससे दूसरे को तकलीफ़ हो वह असफल हैं।”

आहुक से बहुत देर तक जिया अपने मन में उठ रहे उदगार डिस्कस करती रही । उसका मन बहुत हल्का महसूस कर रहा था, इससे पहले किसी ने उससे इतने विस्तार से इस तरह बात नहीं की थी। उसको आहुक की बातें बड़ी सही लगी और अब मन लगा कर काम सीखना शुरू कर दिया। वह पहले की तरह हंसने बोलने भी लगीं। खुश रहने लगी।

आहुक ,सुधा और प्रमोद की इकलौती संतान थी, दोनों के लाड़ प्यार से बिगड़ गया था। लेकिन दुर्घटना के बाद उसकी सोच और व्यवहार में परिवर्तन आ गया था। मौत के मुंह से किसी तरह बच कर आया था तो दोनों पति-पत्नी बस उसे निहारते रहते, उसकी चिंता में घुलते रहते।

आहुक की चाल में फर्क आ गया था,शरीर पर जख्म और सर्जरी के निशान थे जिसके कारण उन्हें चिंता रहती जिससे वह शादी करेगा वह उसे निश्चल प्रेम कर पाएगी या नहीं। प्रेम विवाह तो शायद ही कोई लड़की उससे करेंगी अब और परिवार के दबाव या पैसे के कारण किसी ने हां कर दी ,बाद में सामंजस्य नहीं बैठा सकीं तो क्या करेंगे।

जिया को आहुक से बात करके अच्छा लगता , बहुत प्रोत्साहन मिलता जीवन को समझने का अलग अंदाज नजर आता। आहुक भी कोई न कोई बहाना निकाल कर हफ्ते में एक बार तो उससे मिलने पार्लर आ ही जाता,साथ में जिया के लिए कुछ न कुछ चटपटा खाने के लिए अवश्य लाता। खाने पीने की शौकीन जिया को आहुक का इंतजार रहता ,आहुक का फ़िक्र करना उसको लुभाता । लेकिन दोस्ती से आगे कुछ सोचने की वह हिम्मत नहीं कर पाती। कहीं न कहीं हरित के ठुकराने से दिल में यह बात बैठ गई थी कि वह इस लायक नहीं कि किसी के दिल में जगह बना सकें।

दो साल बीत गए, जिया का कोर्स पूरा हो गया था। अपने जीवन को लेकर वह प्रसन्न और संतुष्ट थी। मां और बहन को भी उसके जाने के बाद उसकी कमी खलने लगी थी इसलिए बड़े प्यार से उससे फोन पर बात करती।इस बीच वह कईं बार इंदौर अपने घर सबसे मिलने भी गई। अपने काम में वह इतनी निपुण हो गई थी , जो पार्लर में आता उससे सलाह लेना चाहता , उससे अपने काम करवाना चाहता। जिया समझ गई थी सौंदर्य का स्त्रियों के जीवन में क्या महत्त्व है,जरा सी कमी कितनी असुरक्षा की भावना और आत्मविश्वास की कमी भर देती है उनके मन में ‌।‌ चुंकि वह स्वयं इस दौर से गुजर चुकी थी इसलिए आने वाली औरतों और लड़कियों की भावनाओं के प्रति वह बड़ी संवेदनशील थी और गंभीरता से यथासंभव मदद भी करती थी।

एक दिन छब्बीस सत्ताइस साल की लड़की को पार्लर में बहुत बैचेन और परेशान देखा । जब वह उसके पास पहुंचीं तो पता चला उसका नाम नीरजा था और उसको शाम को लड़के वाले देखने आने वाले थे। वह चाहती थी उसका जबरदस्त मेकअप किया जाए और वह एक चटकीले रंग की पोशाक लायी थी शाम कै पहनने के लिए। जिया को देखते ही नीरजा बोली :” प्लीज मेरे मेकअप आप कर दो , मुझे इससे पहले कईं लड़के ठुकरा चुके हैं , मुझे बहुत घबराहट हो रही है।अब मैं इसके आगे यह सब नहीं झेल सकती। मुझे बस आपके जैसा सुंदर दिखना है।”

जिया आश्चर्य से उसका मुंह ताक रही थी , सुंदर और वह । उसने सामने लगे शीशे में देखा तो एक मुस्कुराता , दमकता चेहरा नजर आया, आंखों में संतुष्टि और आत्मविश्वास की चमक थी। रात दिन की मेहनत से शरीर अपने आप सुगठित हो गया था। वह नीरजा की ओर पलटते हुए बोली :” आपको इतने लाउड मेकअप की आवश्यकता नहीं है, मैं आपका ऐसा मेकअप करूंगी जिससे आपकी खूबसूरती उभर कर आएंगी। यह ड्रेस मत पहनना , किसी के लिए अपने व्यक्तित्व को मत बदलो ,अगर उसने आपको इस रूप में पसंद कर लिया तो सारी उम्र क्या उसके हिसाब से पहनना ओढ़ना करती रहोगी। जिसमें सहज महसूस करती हो वह पहनना,अगर सामने वाले ने उस रूप में पसंद नहीं किया तो वह इस लायक नहीं है उसके साथ जीवन बिताया जाएं ‌।” यह जिया का अनुभव बोल रहा था।

अगले दिन नीरजा जीया से मिलने आयी , बहुत खुश थी । वह बोली ,:” मेरा रिश्ता पक्का हो गया है, वो बड़े  समझदार इंसान हैं , उन्हें मेरी सादगी अच्छी लगी। मैं चाहती हूं तुम मेरी त्वचा के हिसाब से कुछ टिप्स दो कि मैं आकर्षक दिखूं।” जिया के दिमाग में एक विचार आया, ” ठीक है मैं कल से आपको सेल्फ ग्रूमिंग के विषय में सिखा दूंगी लेकिन पहले मुझे बुआ से बात करनी होगी।”

बुआ को भला क्या एतराज़ होता। जिया ने पार्लर के एक हिस्से में सेल्फ ग्रूमिंग की कक्षा लेनी आरंभ कर दी। सब ठीक चल रहा था लेकिन आहुक ने उससे मिलना जुलना बहुत कम कर दिया था। जिया के मन में उसने एक विशेष स्थान बना लिया था वह दोस्ती के रिश्ते को आगे बढ़ाना चाहती थी।

आहुक के हाव-भाव में अपने लिए चिंता और आंखों में प्रेम देखकर उसका दिल प्रफुल्लित हो जाता था लेकिन उसकी झिझक उसे निराश कर देती। उसको लगता उसके प्रेम में ही कमी है इसलिए वह आगे बढ़ कर अपने प्रेम का इजहार नहीं कर पा रहा है।

वह समझ गई थी आहुक को लगता है हादसे के कारण उसका विवाह करना उचित नहीं है। जिया उससे मिलना चाहती थी लेकिन किस बहाने से मिले ,आहुक तो उसे नजरअंदाज करने लगा है। कैसे उसे विश्वास दिलाये कि उसके शरीर पर पड़े निशान और चाल से उसे कोई अंतर नहीं पड़ता, वो तो बस उसके साथ जीवन बिताना चाहती है। उसको मौका मिल गया। मयूर के दोस्तों में से एक दोस्त निलेश का विवाह इंदौर की किसी कन्या से निर्धारित हुआ। निलेश ने सबको पहले ही ताकीद कर दिया कि सब दोस्त और रिश्तेदार तीन दिन उसके साथ होटल में ठहरेंगे,खूब मस्ती करेंगे।

पहले तो जिया ने सोचा इंदौर में अपने घर पर ठहरेंगी और जब भी कोई कार्यक्रम होगा वह शामिल हो जाएगी । लेकिन निलेश नहीं माना फिर जिया को लगा यह अच्छा मौका है आहुक के इर्द गिर्द घूमकर उसे मजबूर कर देगी अपने प्रेम का इजहार करने को।

सगाई के कार्यक्रम में वह थोड़ा विलंब से पहुंची,होटल में बहुत सी महिलाएं तैयार होने में उससे मदद मांगती रही। जब वह स्वयं बन ठनकर पहुंची तो कईं लोगों ने उसकी देखते ही तारीफ की। समारोह में उसे वधु पक्ष के कुछ लोग जाने पहचाने लगे, उसके बारहवीं के सहपाठी। जल्दी ही माजरा समझ आ गया, वधु हरित की बड़ी बहन थी। हरित रस्में निभाने में व्यस्त था , जिया को उसकी उपस्थिति से कोई फर्क नहीं पड़ रहा था। उसकी नजरें तो आहुक कै खोज रही थी और फिर पार्टी में हर समय उसके साथ ही घूमती रही। हरित को जब फुर्सत मिली तो उसकी नजर मेहमानों पर पड़ी और जिया को देखकर वह दंग रह गया। पहले तो वह उसे पहचान ही नहीं पाया लेकिन जब उसके साथियों ने याद दिलाया तब उसने पहचाना। जिया अपने पुराने साथियों से मिल कर खुश थी लेकिन जब हरित उससे बात करने की बार बार कोशिश करने लगा तो उसे झुंझलाहट होने लगी।

वह उससे पीछा छुड़ा कर मयूर और उसके साथियों के बीच में जाकर बैठ गई। आहुक को जिया का इतना निकट बने रहना अच्छा लग रहा था , चाहता था अपने दिल की बात करना बस हिम्मत नहीं हो रही थी कहीं जिया ने ठुकरा दिया तो। हरित दोनों की नजदीकियां देखकर समझ गया जिया के जीवन में अब कोई आ गया है, उसने तुरंत उसके बारे में पता करने की ठान ली।

शाम को जिया और सब लोग बैठे मस्ती कर रहे थे तब हरित होटल में खाने पीने की व्यवस्था देखने आया। जिया को देखते ही उससे बात  करने के लिए उसके पास ही जाकर बैठ गया। जिया की उससे इतनी कोफ्त होने लगी थी वह उठकर थके होने का बहाना करके अपने कमरे में चली गई।

अगली शाम मेहंदी और संगीत का कार्यक्रम था ,सब नाचने गाने में मस्त हो रहें थे। आहुक के मां पिताजी भी निलेश के बार बार आग्रह करने से आ गये थे।

सुधा का ध्यान बराबर आहुक की तरफ लगा रहता, पिछले कुछ महीनों से गुमसुम लग रहा था।उसे चिंता रहती कहीं किसी कारण परेशान तो नहीं है। जब भी देखती जिया आहुक के पास नज़र आती, उसे वैसे तो जिया सीधी सरल लगती थी लेकिन जिस तरह आहुक जिया को देखरहा था निसंदेह वह उसे पसंद करता है। लेकिन जिया उसे केवल दोस्त समझती हो और उसका दिल न टूट जाएं। फिर यह दुल्हन का भाई ने जाने क्यों बीच-बीच में टपक रहा था।उधर आहुक को भी हरित से खींज महसूस हो रही थी, किसी न किसी बहाने आ रहा था बात करने। जिस तरह से दोनों जिया और हरित तू तू करके बात कर रहे थे आहुक को लग रहा था ये दोनों एक दूसरे को पहले से जानते होंगे। जिस तरह से जिया उससे चिढ़ कर बात कर रही थी उसे लगा कहीं यह वो लड़का तो नहीं जिसने जिया को धोखा दिया था। उसका दिल बैठा जा रहा था कहीं जिया का मन फिर से उसकी तरफ न झुक जाएं ।

जिया के दिमाग में कुछ और ही योजना चल रही थी ,वह सबसे पहले मेहंदी लगवाकर बैठ गई।आहुक आश्चर्य से बोला :” इतनी जल्दी मेंहदी लगवाली अब खाना कैसे खाएगी?” जिया शरमाते हुए बोली :” एक ही प्लेट लगा लीजिए, और दो चार कौर आप मुझे भी खिला देना।” अमुक हंसते हुए बोला :” मुझे कोई एतराज़ नहीं है ।” लेकिन हरित को एतराज़ था ,वह जिया के पास जाकर बोला :” तू मुझे भी तो कह सकती थी , मैं खिला देता।”

जिया :” तू मच्छर की तरह मेरे कान के पास आकर क्यों भिनभिना रहा है? मुझे जब तुझसे बात ही नहीं करनी तो तेरे साथ खाना क्यों खाऊंगी?”

सुधा एक तरफ खड़ी सब देख रही थी , उसे अपने पुत्र की आगे बढ़ती प्रेम कहानी में हरित का टांग अड़ाना सुहा नहीं रहा था। उसने तुरंत हरित को आवाज लगाकर बुलाया :” बेटा देखना , मुझे कुछ मुलायम गर्म नान मंगवा दे , चबाने में बड़ी दिक्कत होती है।” फिर कोई न कोई काम बता कर उसे उलझाएं रखा।

हरित की समझ नहीं आ रहा था जिया आहुक की इतनी दिवानी क्यों हो रही थी । देखने में बुरा नहीं था , पैसे वाला भी था लेकिन हरित को लगता उसके मुकाबले कुछ नहीं था। हादसे के बाद शारीरिक दोष तो आ ही गया था। हरित को विश्वास हो गया कि जिया यह सब उससे बदला लेने के लिए , उसे जलाने के लिए कर रही है। उसने निश्चय किया वह प्यार से दिल खोलकर बात करेगा तो वह अवश्य उसका कहा मान जाएगी।

अगले दिन जिया प्रात: ही अपने घर चली गई , उसने सोचा शाम को वह तैयार होकर सीधे ही बारात में शामिल हो जाएंगी। उसके माता-पिता को भी विवाह समारोह के लिए आमंत्रण मिला था। आहुक के लिए सारा दिन काटना मुश्किल हो रहा था , जिया के बिना उसका बिल्कुल मन नहीं लग रहा था। इन दो दिन में उसे आस बन्ध गयी थी  की  जिया भी उसे पसंद करने लगीं थीं। सुधा पुत्र की बैचेनी देखकर उदासी महसूस कर रही थी,वह चाहती थी आहुक जिया से अपने मन की बात कहें लेकिन डर भी रही थी कहीं जिया ने ठुकरा दिया तो क्या होगा। अगर आहुक ने बात नहीं की और जिया ने किसी और को पसंद कर लिया तो । सुधा आहुक को अपनी एक सुंदर सी अंगूठी देते हुए बोली :” ये ले बेटा उसे पहना दें , अपने मन की बात तो कर , हो सकता है वह भी यही चाहती हो जो तेरे मन में है।”

आहुक आश्चर्य से सुधा की तरफ देख रहा था ,सुधा मुस्कुराते हुए बोली :” तेरी मां हूं तेरी धड़कने पहचान लेती हूं। बड़ी प्यारी लड़की है।”

शाम को उत्साह में बारातियों ने कुछ लम्बा ही चक्कर लगा लिया। मयूर और दोस्त नाचने में इतना मशगूल हो रहे थे कि समय का किसी को भान ही नहीं था। लेकिन आहुक के लिए इतनी देर तक खड़े रहना तकलीफ़ देह हो रहा था , फिर जिया भी अभी तक नहीं आयी थी उसका मन नहीं लग रहा था। सामने विवाह स्थल देखकर उसने सोचा वह वहीं जाकर बैठ जाता है अभी बाराती गेट पर आधे पौने घंटे तो नाचेंगे ही।

उधर जिया को बहुत देर हो गई थी स्नेहलता की तबीयत ठीक नहीं थी इसलिए वह बारात में शामिल नहीं होना चाहती थी। जिया अपने माता-पिता को हाल में बिठा कर बारात में शामिल होने के लिए तेज़ क़दमों से बाहर जा रही थी कि हरित ने उसका रास्ता रोक लिया। तभी आहुक ने भी हाल में प्रवेश किया और हरित को जिया की ओर बढ़ते देखकर वह भी जिया की ओर बढ़ा। हरित पहले पहुंच गया तो आहुक निराश होकर वहीं खंभे का सहारा लेकर खडा हो गया।

हरित :” जिया जो स्कूल में हुआ था उसके लिए मुझे माफ़ कर दो । यामिनी ने उकसाया था मुझे यह सब करने के लिए, कितनी इतराऊ लड़की है तू नहीं जानती। मेरा उससे ब्रेकअप हो गया है। प्लीज मुझे माफ़ कर दें।” जिया के दिमाग में जल्दी थी वह लापरवाही से बोली ,” हां हां ठीक है कोई बात नहीं , पुरानी बातों का क्या याद रखना।”

हरित जिया के रोकने के लिए उसका हाथ पकड़ते हुए बोला :” वही तो मैं कह रहा था , मैं तुझे अपनी गर्लफ्रेंड बनाना चाहता हूं। मेरी इंजीनियरिंग की पढ़ाई एक डेढ़ साल में खत्म हो जाएगी , नौकरी लगते ही हम शादी कर लेंगे।”

जिया हाथ छुड़ाते हुए :” नहीं मुझे अब तुझसे कोई रिश्ता नहीं रखना है ,तू मेरे रास्ते से हट।”

हरित :” तू अपने आपको क्या समझने लगीं है ,एक तो खुद आगे बढ़कर तुझसे बात कर रहा हूं।”

जिया :” तो मुझ पर एहसान कर रहा है,जब मुझे तुझसे कोई मतलब ही नहीं रखना तो क्यों परेशान कर रहा है।तू जब चाहे किसी का मजाक बना दे और जब चाहे सब तेरे आगे बिछ जाएं। तुझे पता भी है तेरे कारण मेरा क्या हाल हुआ था, मेरे सपने मेरा आत्मविश्वास सब छीन लिया था तूने। वो तो अगर मेरी बुआ और आहुकजी ने मुझे नहीं संभाला होता तो आज मैं या तो डिप्रेशन की मरीज़ होती या मैंने आत्महत्या कर ली होती। तेरे माफी मांगने से क्या होता है,मेरा वह समय क्या तू लौटा सकता है ‌”

हरित को अभी भी अपनी गलती का अहसास नहीं हुआ था, उसे लगा रहा था उस जैसे लड़के को जिया कैसे ठुकरा सकती है।

आहुक यह सब बातें सुन रहा था ,उसके मन हुआ दख़लंदाज़ी करके हरित को जाने के लिए कहें लेकिन वह खामोश खड़ा रहा।

हरित :” देख मैं समझ सकता हूं मेरे कारण तुझे बहुत दुःख पहुंचा और जो लड़का तुझे सामने दिखा तुने उसके कंधे का सहारा लिया ‌। लेकिन अब तो मैं आ गया हूं,अब तुझे उस लंगड़े में क्या…”

जिया ने बहुत जोर से अपनी ऊंची ऐड़ी की सेंडल से हरित के पैर पर वार किया और गुस्से से बोली :” खबरदार एक शब्द भी फालतू आहुकजी के बारे में बोला तो तेरे दूसरे जूते में भी छेद कर दूंगी। तू उनके बारे में जानता ही क्या है,वो कितने अच्छे इंसान हैं ,तू तो उनके पैर की धूल भी नहीं है। मेरे मन में उनके लिए कितना प्रेम और आदर है तुझ जैसा कमीना इंसान तो समझ ही नहीं सकता इस बात को।अब तू कल तक मेरे सामने भी मत पड़ना वरना…।”

उसकी बात पूरी होने से पहले ही हरित लंगड़ाते हुए वहां से निकल गया ‌।

जिया की बातें सुनकर आहुक की आंखें नम हो गई, जिया अपने को संयत करने के लिए कुछ पल को रुकी हुई थी। इतने में आहुक उसके सामने आ गया ‌आहुक के चेहरे के भाव देखकर वह समझ गई उसने सब सुन लिया है।वह बोलने की स्थिति में नहीं था, अंगुठी हाथ में लिए उसको देखें जा रहा था। जिया ने तुरंत अपना हाथ आगे बढ़ा दिया, अंगुठी पहनते ही उसके भी आंसू निकल गए और वह आहुक के गले लग गयी।उधर सुधा और प्रमोद को जब बेटा बहुत देर तक नहीं नजर आया तो ढूंढते हुए हाल में आ गए। सामने दोनों को गले लगा देख कर सुधा खुशी से पागल हो गई। लगभग भागते हुए उनके पास जाने लगी तो प्रमोद ने उसका हाथ पकड़ कर रोकते हुए कहा:” सुधी बच्चों को इस खुशी के पल को महसूस करने दें,हम कौन से भागे जा रहे हैं।”

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