उबाऊ जिंदगी

Ubaoo Jindagee

वह बहुत थका हुआ शाम घर में घुसा तो पत्नी देखते ही बोली ,”बिट्टू के स्कूल वाले दो दिन के लिए घुमाने ले जा रहे हैं, हजार रुपए मांग रहे हैं।” वह इतना बेदम हो रहा था कि प्रतिकार करने और बहस करने की भी ताकत नहीं थी। कुछ समय से वह रुपए बचा रहा था अपनी दो शर्ट लाने के लिए, अधिकतर के काॅलर खराब हो गए थे । अब वह बेटे  को  वही पैसे दे देगा। उसको चुप देख पत्नी उल्हाना भरी आवाज में बोली,” हम तो उसे कहीं लेकर नहीं जाते कम से कम स्कूल की तरफ से तो जाने दो।” वह जब भी ऐसी बातें सुनता उसे ग्लानि होती ।वह अपने बीवी बच्चों को उतना नहीं दे पाता था जितनी उनकी उम्मीदें थी ।वह अपने अंदर कहीं और सिमट जाता कि उसके अंदर पैसा कमाने की क्षमता इतनी कम क्यों है। सालों हो गए हैं एक अंतहीन कुएं को भरने की कोशिश में लेकिन उसकी असफलता उसको मुंह ही चिढाती रही  । मुंह हाथ धोकर व खाने बैठा तो पत्नी ने लौकी की सब्जी के साथ फुल्के सेंक कर दिए। कुछ कहेगा तो सब्जियों की महंगाई पर चर्चा शुरू हो जाएगी और बात भी सही है। वह खाना खा कर टीवी के आगे बैठ गया सोने से पहले एक घंटा उसके पास करने को कुछ नहीं था।

दस पंद्रह मिनट में पत्नी भी रसोई का काम निपटा कर उसके पास आकर बैठ गई। टीवी की तरफ देखते हुए बोली,” अरे यह क्या देख रहे हो, कोई ढंग का सीरियल देखते ना।” दस मिनट से देख रहा था तो उसे कुछ ठीक लग रहा था, वह थका सा बोला, “अब यही लगा रहने दो, तुम तो दिन में भी देख ही लेती हो।”

पत्नी  आश्चर्य से उसकी तरफ देखते हुए बोली,” तुम्हें क्या लगता है मैं दिनभर टीवी के सामने बैठी रहती हूं ? घर में कितने काम रहते हैं एक पल की फुर्सत नहीं मिलती।” वह जानता था वह सही कह रही है घर को साफ-सुथरा और सुव्यवस्थित रखने के लिए सारा दिन काम में लगी रहती होगी। हारे हुए खिलाड़ी की तरह उसने रिमोट पत्नी के हाथ में थमा दिया।

पत्नी के करीब सरकते हुए उसने पत्नी का हाथ थाम लिया। पत्नी ने हाथ झटकते हुए उसकी तरफ देखते हुए कहा ,”और कुछ नहीं सूझता क्या?” वह हतप्रभ सा पत्नी की तरफ देख रहा था, उसने तो केवल इसलिए हाथ पकड़ा था कि यह जान सके कि जिसके दिल से दिल जोड़ कर उसने गृहस्थ जीवन शुरू किया था उसकी धड़कनों से उसकी धड़कन अभी भी एकमेक होती है या नहीं। लेकिन साथ साथ चलते हुए भी उनके बीच इतने फासले आ गए थे कि अब तो एक दूसरे की धड़कन भी मुश्किल से ही पहचान पाते थे ।वह पस्त सा उठकर  सोने चला गया । अगली सुबह एक और उबाऊ दिन का सामना करने के लिए कुछ देर बेसुध होना आवश्यक था।

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