यादगार पल

Yaadagaar Pal

बेटा कालेज की पढ़ाई करने दूसरे शहर जा रहा था और अपना सामान बांध रहा था । मैं वहीं उसके आसपास मंडरा रहा था,बार बार हिदायतें दे रहा था। वह झुंझला रहा था , “एक ही बात कितनी बार बोलोगे,पता है मुझे भी ।” पत्नी हाथ खींच कर बाहर ले गईं ,बोल रही थी :”रहने दो न , कितने निर्देश दोगे। इसलिए चिढ़ जाता है वह , उसे स्पेस दो।”

स्पेस दूं मतलब दूरियां बढ़ा लूं , पहले ही कितना दूर होता जा रहा है । क्या करूं कितना सोचता हूं नियंत्रण रखूं दिल पर लेकिन उम्र के साथ मन कच्चा रहने लगा है ,न चाहते हुए भी चिंताग्रस्त रहता है।उस दिन पहली बार देर रात तक चलनेवाली पार्टी में जा रहा था। मैं जानता था उसको गुस्सा आएगा फिर भी बोले बिना नहीं रहा गया :”जल्दी आने की कोशिश करना‌।

वह झुंझला कर बोला था :”जब पार्टी खत्म होगी तब ही तो आऊंगा, सिंड्रेला की तरह ठीक बारह बजे निकलना है तो जाने को रहने देता हूं।”

दिमाग में यह सब बातें घूम रहीं थीं और मैं सिर झुकाए उसके कमरे के बाहर बैठा था। पत्नी समझाने के उद्देश्य से बोली :” दुखी क्यों होते हो ,इस उम्र में बच्चे थोड़ा अधिक जोश में होते हैं।”

ठीक कह रही थी वह , मैं ने भी अपने पिता की बिना ब्रेक की रोक-टोक से तंग आकर विदेश में नौकरी ढूंढ ली थी।कितना गुस्सा हुए थे ,बार बार एक ही बात कहते रहे :” अभी से इतनी दूर चला जाएगा , यहां भी अच्छी नौकरी मिल सकती है।”

मैं ने झुंझलाकर कहा था :” तो क्या यहीं पड़ा रहूं सारी उम्र , आगे बढ़ने की कोशिश न करूं।”

मैं जैसे ही जाने लगा मुझे गले लगा कर बोले :” मैं ने जिंदगी में किसी को अपने से अधिक प्यार किया है तो वह तुम हो । कुछ भी चाहिए हो या कोई भी परेशानी हो तो बस एक बार फोन कर देना।”

तब मैं हां हां ठीक है कहकर जल्दी से निकल गया था। एक महीने बाद ही खबर आ गई वे नहीं रहें, इतनी दूर से आ भी नहीं पाया था। वह पल ऐसा यादगार पल बन गया जब भी उनकी याद आती वह पल अवश्य याद आता और एक टीस दिल में उठ जाती।

बेटा सामान बांध कर सामने खड़ा था ,बाहर टेक्सी में उसका दोस्त इंतजार कर रहा था, दोनों साथ जाने वाले थे। पिता के कहे हुए शब्द अनायास बेटे के लिए निकल गये ।वह कसकर गले लगते हुए बोला :” मैं जानता हूं डैड ,कभी कभी रूडली  बोल जाता हूं उसके लिए सॉरी ।आप दुनिया के बेस्ट डैड हो इसलिए मैं आपसे बहुत प्यार करता हूं।” यह कहकर बेटा उस पल को यादगार बना गया ,एक ऐसे भाव से आत्मा को सींच गया कि आंखे नम हो गई।

2 thoughts on “यादगार पल

  1. बहुत ही सुंदर मनोवैज्ञानिक कहानी है । धन्यवाद जी

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